लेखक बनो

एक बार एक बिद्यार्थी ने प्रेमचंद से पूछा, हे कथा सम्राट प्रेमचंद जी हम लेखक बनाना चाहते हैं। आप मुझे कुछ टिप्स और ट्रिक्स बतायीए । प्रेमचंद जी ने बालक को समझाते हुए बोला, हे बालक सब कुछ बनना मगर लेखक कभी ना बनना। लेखक भगवान् कि सबसे खराब कृति है। बिदयार्थी जी शंका मे पर गए । अब करे तो कया करे। अखिर प्रेमचंद जी ऐसा कयों बोल रहे हैं। उसने फिर से एक बार प्रश्न दुहराया । हे उपन्यास सम्राट आप ऐसा कयों बोल रहे हैं । लेखक तो समाज के लिए बहुत कुछ करता हैं फिर आप लेखक बनने से मना कयों कर रहे हैं। प्रेमचंद जी ने जवाब दिया देखो विद्यार्थी जी दुनिया को भले लगे कि लेखक समाज के लिए कुछ करता है। मगर ये बात बिल्कुल गलत है किसी भी लेखक का इतिहास उठा के देख लो एक ही चीज़ देखने को मिलेगा। जिसका अपना कोई नही होता है वो समाज के लिए नही लिखेगा तो और कया कर सकता हैं। उसके पास जीने के लिए और कोई उपाय नही इसी लिए लिखता है। कोई भक्ती से नही लिखता .विधार्थी जी थोडा चक्कर मे पद गए । फिर से अपना सवाल दुहराया । हे प्रेमचंद महाराज आप साफ साफ कयों नही बताते कि लेखक बनने के लिए क्या जरूरी है। प्रेमचंद जी बोले - देखो जब तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो सुनो लेखक बनाया नही जाता बल्कि लेखक जनमता है । कोई कोई लेखक जनम जात लेखक होता है और किसी किसी को परिस्थिति लेखक बाना देती है। आदमी का जब जीवन टूट जाये तो बस वो कुछ भी लिखे उसमे दर्द ही होगा और ये समाज कि बिडम्बना है कि लोग उसी रचना को जयादा पसंद करते हैं जिसमे जयादा दर्द और पीडा हो।