द्वंद
कभी कभी सोचता हूँ भारत लॉट के ही कया कर लूँगा। साला हर चीज़ मे हुज्जत । सभी लोग तो स्वार्थी हैं। जिसको देखो वहीँ हमारे प्रगति से जल रहा है। कोई आगे बढ़ता हुआ नही देखना चाहता है। पिछला २७ साल तो बर्बाद किये ही हैं। अब जिन्दगी का कुछ पल शांति से जी लिया जाये। इधेर ही अकेले मे घर बसा लो । ना तो बिजली पानी का चक्कर हैं । और ना ही लाद्दाई झगड़ा का झंझट । जो मन मे आये करो जैसे मन मे आये रहो। मन करे किसी के साथ सेक्स करो मन करे कहीँ घूमने निकल जाओ । मन करे दारू पीओ मन करे नशे मे स्ट्रिप क्लब निकल जाओ। यहीं सब जिन्दगी है । जो मन करे वहीँ करो यहीं जिन्दगी है। मगर साला ये सब जानते हुए भी हम कुछ नही कर सकते । बिच मे सव्यता टांग रोकती हैं. हमारी सभ्यता भी कैसी है जो जन्मने के साथ ही बिना बच्चे से पूछे ढ़ेर सारे अंध बिस्वसो का कूदा कचरा दिमाग मे भर देती हैं। मेरे बाप दादा ऐसे कियें हैं इसी लिए हमको भी वैसे ही करना है. हमारे बाप दादा जाये चूल्हा मे .यहीं लोग अच्छे हैं। जो मन मे आता हैं करते हैं। सही मे जिन्दगी भी यहीं हैं। जिन्दगी अपनी है ज़ीने का अधिकार भी हमे ही होना चाहिऐ । आज से दो साल पहले मुझे कोई कहत कि भारतीय सभयता मे ये गलत है वो थिक नही है , तो शायद उसे जूता लगा देता। मगर आज अगर कोई कुछ बोलेगा तो सबसे पहले तो अपने दिमाग से भर पेट सोचूँगा कि सामने वाला सही बोल रह है या गलत फिर उसको जवाब दूंगा। सोचना बहुत जरूरी है। बचपन से मेरे साथ बहुत बड़ी जयाद्ती हुई । बिना कुछ सोचे समझे हुए ढेर सारे चीज़ें हमारे उपर लोड कर दी गयी है। सभी गडे मुर्दो को उखाड़ उखाड़ के फिर से सोचना पड़ेगा पड़ेगा कि कया गलत है और कया सही। ऐसे ही किसी बात को गलत या सही मान लेना अन्ध्बिस्वास हैं। और दुर्भाग्य कि बात ये है कि हम अन्ध्बिस्वास को धरम का नियम कानून मान लेते हैं। जब हर आदमी का रुप रंग अलग है , जब हर आदमी पानी पीता है अलग घट का , जब हर आदमी बड़ा होता है अलग समाज मे तो फिर उसका धरम एक कैसे हुआ। मैं नही मानता धरम और मुझे कोई भी सरम नही ये बात स्वीकार करने मे ।
हाँ तो मैं बात कर रहा था इधर ही रहेने कि । कनाडा के लोग अच्छे हैं । माहोल शांत है। लोग पढे लिखे हैं। नही हम कैसे रह सकते हैं। हमने भारत सरकार का पैसा खाया है। हमने गरीब जनता का टैक्स खाया है। मुझे उनके लिए कुछ करना चाहिऐ। बात तो १००% फीसदी सही हैं। नमक खा के नमक हरामी करना अच्छी बात नही। और वो भी जनता का नमक। मरने पे पाप लगेगा। नही नही मैं कोई पाप होने से पहले अपना टैक्स चूका दूंगा । अरे कितना टैक्स खाया है। जो भी खाया है वो चार पांच साल मे चुकता हो जाएगा । हम तो सोच भी रहे हैं कौन सोचता खा के पचा जाओ और फिर अगर डकार आये तो चुप चाप दबा दो. यहीं तो प्रथा है चिन्ता मत करो यार चूका दूंगा कर्जा कहीँ भगा नही जा रह हूँ . और चुकाने क बाद अपनी जिन्दगी जीना चाहता हूँ यार। भगवान् भी साला कया चीज़ धरती पे ही इतना उलट पुलट कयों बनाया। एक तरफ भारत दुसरी तरफ अमेरिका। एक तरफ आदमी को लिखने के लिए कजग नही मिल रहा है और दुसरी तरफ आदमी को गांड पोछने के बाद भी काजग खतम नही हो रहा है। एक तरफ नयी नवेली दुल्हन के लिए लिपस्टिक नही और दुसरी तरफ बुदिया औरत भी वियाग्रा खा रही है। खैर इसमे उस औरत कि भी कोई गलती नही हैं। उसने तो दुनिया देखा ही नही। जो जैसा देखेगा ही नही वो तो वायग्रा कह्ये या फिर सल्फास कि गोली कया फरक पड़ता है . हम तो कहते हैं सब भगवन कि ही चाल है।
ये जीवन बहुत छोटा है। कुछ नही कर सकते हम । कितनों नव नवेली दुल्हन को लिपिस्टक ला के देंगें। एक दो जयादा से जयादा तीन । तीन के बाद तो हम भी थक जायेगें। और मुझे बिल्कुल अच्छी तरह से पता है समुन्दर का चार बूंद पानी पिने समुन्दर का तल कम नही होने जा रहा है।
